An Incomplete Love Story In Hindi
ये क्या है..??? किसका आइडेंटिटी कार्ड है??जय सुबह-सुबह मॉर्निंग वाक पे जा रहा था तभी रोड पे उसे ये आई कार्ड पड़ा हुआ दिखा..आई कार्ड पर लिखा था
नाम- शालू शुक्ला
कक्षा-बी.ए द्वितीय वर्ष
और पिता जी का नाम, कॉलेज का नाम और पता भी लिखा हुआ था। उस आई कार्ड पर एक पासपोर्ट साइज़ की फोटो भी थी उसमे शालू बड़ी ही खुबसूरत नज़र आ रही थी।
जय(मन में सोंचते हुए)- कितनी प्यारी लग रही है क्यों न इस से मिला जाये..इसका आई कार्ड पहुँचाने के बहाने..मगर कोई मुझे गलत न समझ ले। न जाने कौन कौन हो उसके परिवार में। समझ में नही आ रहा दूँ या न दूँ।
चलो दे ही देता हूँ मेरे घर से 5 किमी ही तो दूर है ये पता..जो होगा देखा जायेगा।
जय उस पते पर पहुँचता है और डोर बेल बजाता है..
एक बूढ़े व्यक्ति दरवाजा खोलने आते हैं..
बुजुर्ग व्यक्ति(बड़े ही चिडचिडे स्वाभाव से)- क्या चाहिए..कौन हो तुम किस से मिलना है..
जय- जी शालू का यही घर है??
बूढ़ा व्यक्ति- अच्छा तो तू यहाँ तक आ गया मेरी बेटी को परेशां करने?? पहले कॉल करके परेशान करता था और अब इतनी हिम्मत की..कि सीधे यहाँ चला आया..रुक पुलिस को बुलाता हूँ रुक साले रुक भो****
जय- जी आप गलत समझ रहे हैं जरा तमीज से पेश आइये। आप बड़े हैं बस इसीलिए लिहाज कर रहा हूँ..।
शालू के पिता- अच्छा तो तू मेरे ही घर आकर मुझी से अकड़ेगा हाँ बोल बोल???????
जय- अंकल जी एक बात सुन लीजिये मै उन लड़को जैसा नही हूँ और न ही आपकी सुपुत्री से मिलने आया हूँ न ही कोई शौक है वो तो बस सुबह मुझे ये आई कार्ड मिल गया था उसी को लौटने आया हूँ ये देखिये...
और जय उनके हाँथ में आई कार्ड थमा देता है..
बूढ़ा व्यक्ति या यूँ कहूँ शालू का पिता आई कार्ड में आँखे गड़ा कर देखता है। शायद दूर दृष्टि दोष था उनको...
शालू के पिता- अरेरे माफ करना बेटा...मै बिना सोंचे समझे इतना कुछ बोल गया..आओ अन्दर आओ बेटा चाय पि लो ?
जय- सॉरी अंकल में चाय नही पीता..
पास खड़ी शालू ये सब देख रही थी..
तभी उसकी आवाज आई- पी लीजिये न..इतनी रिक्वेस्ट कर रहे हैं पापा..प्लीज पी लीजिये..और थैंक यू सो मच..मेरे आई कार्ड के लिए..
वो क्या मीठी आवाज थी जय तो कुछ पल के लिए खो ही गया और जब उसकी नज़र शालू से मिली तब माशाल्लाह क्या कहना..वो बला की खुबसूरत..फोटो से भी 10 गुना ज्यादा खुबसूरत थी..मन कर रहा था कि बस उसी की नजरों में खो जाऊं..जय कुछ समझ नही पाया क्या कहे??
जय- जी ज़रूर पियुङ्ग पियूँगा चाय..एंड यू आर सो ब्यूटीफुल..धीरे से उसने शालू के कान के पास कहा..
शालू मुस्कुरा कर चल दी..फिर वो सामने नही आई..जय भी चाय पीकर चला गया..
अब जय के पास कोई बहाना भी न था शालू के पास जाने का..वो बस रोज उसे उसके कॉलेज के आस पास और उसके घर के पास ढूंढ़ता..पर उसे शालू न दिखी..शायद उसके पिता उसे ज्यादा बाहर जाने की इज़ाज़त नही देते..पर जय उसे आज भी तलाश करता है..उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब है..जय को उसके सिवाय और कोई लड़की अब पसंद नही...जय हमेशा यही सोंचता शायद किस्मत मिला देगी एक दिन......
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